AZAB SCHOOL KE GAJAB USOOL

 

कहते सरकार देश को शिक्षित करने के लिये बड़े बड़े कदम उठा रही है ये कदम सफल नही होसकते जब तक
देश की सरकारो को जिम्मेदार ठहराने वाली जनता खुद शिक्षा के प्रति जागरुक नही होती.
इस कहानी के जरिये सरकार की नही जनता की पोल खुलेगी.
कानपुर शहर की
एक सड़क है जिसमे एक स्कूटी मे दो बहने  सवार है रोली नाम की   लड़की (बड़ी बहन)  स्कूटी चला रही है और शीतल नाम की  लड़की ( छोटी बहन) पीछे बैठी है    स्कूटी चल रही है,
शीतल काम  स्कूल टीचर के लिये जॉब इंटर्व्यु है दोनो मे वार्तालाप होरही है:
शीतल : अरे यार! मुझे डर इस बात का है कि मैने अाज तक किसी मच्छर तक को नही पढ़ाया है, ये 10th के स्टुडेंट्स मुझसे सम्भलेंगे?
रोली: देख! मुझे तुझपे पूरा भरोसा है अाखिरकार तू पढ़ाई मे बहुत अच्छी रही है,  (अचानक स्कूटी रोक कर एक दूकानवाले से पूछती है) अंकल ! ये ‘सरस्वती देवी हाई स्कूल ‘
कहा पड़ेगा?
दुकानदार (मोटे लेंस वाला चश्मा पहने हुआ एक सरदार): (चश्मे को नाक की  तरफ खिसकाते हुये) :  जी आंटी! क्या कहा अापने?
शीतल: भइया ये सरस्वती देवी हाई स्कूल किस तरफ है? बता देंगे, प्लीज़!
दुकानदार: (मुस्कुराते हुये)
‘ सरस्वती देवी हाई स्कूल’ अागे से दाये फिर बाये फिर दाये फिर सीधा …
शीतल: (दुकानदार के बताने के अन्दाज से घबराई हुई) थेक्यु
भइया.
(दोनो अागे बढ़ जाती है)
शीतल: वो लड़का तुम्हे अंकल लग रहा था?
रोली: अरे यार! इतनी बड़ी बड़ी घासफूस जैसी दाढ़ी मूछे, पेट निकला हुआ, मुझसे गलती होगई समझने मे.
( झोपड़ पट्टी वाला एरिया है, लोग उन दोनो को घूर घूर कर देख रहे है कि वे वही खड़े एक व्यक्ति स्कूल का  पता पूछती है, तभी वही झुंड मे खड़े लड़को मे से एक अावारा लड़का शीतल रोली की  तरफ देख कर  गाना गाता है)
लड़का: (सुरीला  अन्दाज पर गन्दी अावाज) बन जा तू मेरी रानी …
शीतल और रोली उसकी तरफ घूर कर देखती है वह लड़का दूसरी तरफ देखने लगता है पर गाना बन्द नही करता
और धीरे धीरे चला जाता है)
शीतल: वाह क्या बात  है! लड़की भी छेड़ ले और किसी को पता न चलेi
रोली: (मजाक उड़ाते हुये) इसने तो सुर को हरा दिया, he is
Indian Idol.
वो काफी अागे निकल अाती है तो एक गली दिखाई पड़ती है वे उसमे घुस जाती है,
शीतल:  (एक घर के बाहर लगा हुआ बोर्ड पढ़ते हुये) ‘सरस्वती देवी हाई स्कूल’ (सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त)  रोली! गाड़ी रोको लगता है यही स्कूल है’
शीतल स्कूल के अन्दर जाती है वहां कोई चपरासी या अाया नही है वह स्कूल एेसे देख रही है जैसे उसने एेसी जगह पहले कभी देखी नही एक ऑफिस है पर वहां अंदर  कोई नहीं पर  उसके बाहर एक अधेड़ व्यक्ति  कुर्सी पर बैठा हुआ है ,
शीतल: Excuse me, मुझे स्कूल के प्रिंसिपल से मिलना है.
व्यक्ति: (शीतल के हाथ मे resume देखते हुये) दिखाइये resume .
शीतल resume दे देती है वह व्यक्ति resume देखता है
और कहता है कि सैलेरी कितनी expect करती है अाप
शीतल: जी मुझे principle से मिलना है.

व्यक्ति: I’m Badrinath Panday , Principle of Sarasvati Devi High school  (खड़ा होकर जा के ऑफिस वाली चेयर पे बैठ जाता) Now let me know What salary  you expect to be deployed  as Math teacher for  9th – 10th class.
शीतल: (सोचती है कि ओ हो! यही  बुढढा प्रिंसिपल है , इंगलिश तो अच्छी है पर प्रोनंशियेशन इस स्कूल की  तरह जर्जर है जैसे एम  को यम, फॉर को फार)
सर! at least 5000/-
बद्रीनाथ: (मुस्कुराते हुये) इतना तो हम नही दे पायेंगे.
शीतल: (ऊपर से नीचे तक स्कूल की  दीवारो को ऊपर से नीचे तक देखती) ओके ! ये हिन्दी मीडियम स्कूल है ? तो 3000/- तो होना चाहिये.
बद्रीनाथ: ये भी थोड़ा ज्यादा होगा.
शीतल: (चिढ़कर बनावटी मुस्कुराहट देते हुये) आप ही बता दीजिये कितनी सैलेरी देसकते है आप?
बद्रीनाथ: अगर आपका पढ़ाने का तरीका  हमारे  स्टुडेंट्स को संतुष्ट कर देता है तो हम अापको 1500 rs/-
देंगे फिर आगे बढ़ा देंगे.
शीतल: ( चेहरा इस तरह का होगया है जैसे करेले का जूस पीने के बाद होजाता है) ओके नो प्रॉब.
बद्रीनाथ: तो अभी डेमो क्लास लेंगी ?
शीतल: एक्चुअली!  मुझे अभी जाना है कही , मेरी सिस्टर बाहर इंतजार कर रही है.
बद्रीनाथ: ओके
शीतल लम्बे कदम मार कर जल्दी से स्कूल से बाहर निकलने की कोशिश कर रही है, पुल करके exit करने के बजाय पुश कर रही है, जैसे ही बाहर निकलती है तो देखती है रोली स्कूटी लिये खड़ी है वह उस देख कर मुंह बनाते हुये कहती है
ये स्कूल  इतना.. (चारो तरफ देखते देखते हुये अचानक पीछे मुड़ कर देखती है तो पाती है कि सामने बद्रीनाथ बाहरी गेट पर खड़े है) बहुत अच्छा है (मुखमुद्रा बदल देती है) हैव अ नाइस डे सर!
बद्रीनाथ: थैंक्यु!
शीतल स्कूटी मे बैठ जाती है काफी अागे निकल जाने के बाद रोली:  ये अमरीशपुरी जैसे दिखने वाले  अंकल प्रिंसिपल थे या चपरासी? आय एम कंफ्यूज़्ड.
शीतल: (सदमा सा लगा है इसलिये बिना फेस एक्सप्रेशन दिये) दोनो था.
रोली: अच्छा! प्रिंसिपल भी यही ! टीचर भी यही! चपरासी या  आया भी यही, कही एेसा न हो कि स्टुडेंट भी यही हो (जोर से हंसने लगती है)
शीतल: तुम मेरा मजाक उड़ा रही हो… पर कोई बड़ी बात नही कि ये सच हो,
इतना घटिया स्कूल मुझे नही पढ़ाना इस खहन्डर मे,  इतने कम पैसे मे इससे ज्यादा तो मै किसी के घर मे झाड़ु पोछा कर दू इससे ज्यादा सेलैरी मिलेगी.
रोली: पर यहां पढ़ा कर एक्सपीरियंस लेना ज्यादा  एक्साइटिंग रहेगा फिर हम एक डरावनी फिल्म बनायेंगे ‘ स्कूली खहन्डर और भूतिया बुढ्ढा’ . (हंसने लगती है)
रोली की  बात सुन कर शीतल कुछ सोचने लगती है..

to be continued

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