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Vikram

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active 5 months, 3 weeks ago
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Vikram's Latest Activity See All →

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    Vikram wrote a new blog post: कोई फूल धूप की पत्तियों में   6 months, 3 weeks ago

    बशीर बद्र

    1.

    कोई फूल धूप की पत्तियों में, हरे रिबन से बंधा हुआ ।
    वो ग़ज़ल का लहजा नया-नया, न कहा हुआ न सुना हुआ ।

    जिसे ले गई अभी हवा, वे वरक़ था दिल की किताब का,
    कही आँसुओं से मिटा हुआ, कहीं, आँसुओं से लिखा हुआ ।

    कई मील रेत को काटकर, कोई मौज फूल [...]

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    Vikram wrote a new blog post: रामप्रसाद बिस्मिल   6 months, 4 weeks ago

     

    1

    अरूजे कामयाबी पर कभी तो हिन्दुस्तां होगा ।
    रिहा सैयाद के हाथों से अपना आशियां हेागा ।।
    चखायेगे मजा बरबादिये गुलशन का गुलची को ।
    बहार आयेगी उस दिन जब कि अपना बागवां होगा ।।
    वतन की आबरू का पास देखें कौन करता है ।
    सुना है आज मकतल में हमारा इम्तहां होगा ।।
    जुदा मत हो [...]

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    Vikram wrote a new blog post: देश के हालात सुधरने की क्‍या उम्‍मीद   6 months, 4 weeks ago

    ”चारों ओर काफी समझदार लोग नज़र आते हैं लेकिन हरेक को अपनी जिंदगी खुशहाली से बिताने की फिक्र है। तब हम अपने हालात, देश के हालात सुधरने की क्‍या उम्‍मीद कर रहे हैं।”

    ” वे लोग जो महल बनाते हैं और झोंपडि़यों में रहते हैं, वे लोग जो सुंदर-सुंदर आरामदायक चीज़ें बनाते हैं, खुद पुरानी और [...]

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    Vikram wrote a new blog post: अँधेरे चंद लोगों का अगर मक़सद नहीं होते   6 months, 4 weeks ago

    जन-गण-मन / द्विजेन्द्र ‘द्विज’

    अँधेरे चंद लोगों का अगर मक़सद नहीं होते

    यहाँ के लोग अपने आप में सरहद नहीं होते

    न भूलो, तुमने ये ऊँचाईयाँ भी हमसे छीनी हैं

    हमारा क़द नहीं लेते तो आदमक़द नहीं होते

    फ़रेबों की कहानी है तुम्हारे मापदण्डों में

    वगरना हर जगह बौने कभी अंगद नहीं होते

    तुम्हारी यह इमारत रोक पाएगी हमें कब तक

    वहाँ भी [...]

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    Vikram wrote a new blog post: सबसे ख़तरनाक   6 months, 4 weeks ago

    रचनाकार: पाश

    मेहनत की लूट सबसे ख़तरनाक नहीं होती
    पुलिस की मार सबसे ख़तरनाक नहीं होती
    ग़द्दारी और लोभ की मुट्ठी सबसे ख़तरनाक नहीं होती
    बैठे-बिठाए पकड़े जाना बुरा तो है
    सहमी-सी चुप में जकड़े जाना बुरा तो है
    सबसे ख़तरनाक नहीं होता
    कपट के शोर में सही होते हुए भी दब जाना बुरा तो है
    जुगनुओं की लौ में पढ़ना
    मुट्ठियां भींचकर बस [...]

Vikram's Wire See All →

  • सुन्दर पन्क्तिया है ।

  • beautiful lines

  • गार्गी प्रकाशन अपने पाठकों को कम मूल्य पर ऐसा स्तरीय और सुरुचिपूर्ण साहित्य उपलब्ध कराने का प्रयास करता है जो जनता में न्याय, समानता और एक बेहतर जीवन के लिए संघर्ष की भावना उत्पन्न करे. आज देश और दुनिया के पैमाने पर जनविरोधी और मानवद्वेषी मूल्यों, मान्यताओं और संस्कृति के घटाटोप में यह प्रकाशन जीवन और समाज के लिए सार्थक और उपयोगी संस्कृति के बीजारोपण की चेष्टा करता है. खासकर वह विश्व साहित्य की ऐसी अनुपम और कालजयी कृतियों को हिंदी पाठकों के लिए प्रस्तुत करता है जो मानवता के एक बेहतर भविष्य के लिए उनमें आशा और उत्साह का संचार करें.

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